परियोजना का संछिप्त विवरण
यह पाठ उत्तर प्रदेश (या अन्य हिंदी भाषी प्रदेश) में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और उनके बच्चों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालता है।
उत्तर प्रदेश में श्रमिकों के कल्याण के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे श्रमिक जो प्रदेश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं, को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008 के प्रभावी प्रवर्तन की कार्यवाही सुनिश्चित करने के सम्बन्ध में प्रदेश में उल्लेखनीय कार्यवाही की गयी है।
श्रमिकों के कल्याण की दिशा में लगभग 10 लाख श्रमिक जो कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार हैं, जिनके 0 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं देखभाल की आवश्यकता है। जो निर्माण श्रमिक भवन, सड़क, रेलमार्ग, पुल, ईंट भट्ठा आदि स्थानों/प्रतिष्ठानों पर कार्य करते हैं, वहां कार्यस्थल पर ही इन श्रमिकों के छोटे बच्चे (0 से 6 वर्ष) और बड़े बच्चे (6 से 14 वर्ष) कंधों पर होते हैं और कार्यस्थल अथवा घर पर उपेक्षित रहते हैं।
अवसरों से वंचित व समाज की विसंगतियों में जी रहे इस वर्ग के बच्चे प्राथमिक/प्रारम्भिक शिक्षा से अपवंचित ही नहीं हैं, अपितु वे शिक्षा की ओर से विमुख भी होते हैं। इन अपवंचित बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना केवल एक कार्यक्रम का संचालन करने तक सीमित नहीं है, वरन् एक चुनौती के रूप में है।
उद्देश्य
- निर्माण श्रमिकों के बच्चों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर उनके लिए अनुकूल शैक्षिक वातावरण निर्माण करना।
- निर्माण श्रमिकों के 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग बच्चों को प्रारम्भिक शिक्षा प्रदान कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना।
- निर्माण श्रमिकों के बच्चों की कार्य क्षमता के विकास में सहायता करना।